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नालंदा में ‘बेबी मेकिंग’ स्कैम का भंडाफोड़: ‘गर्भवती करो और लाखो कमाओ’ के नाम पर देशभर में ठगी, 6 गिरफ्तार

By BHDK
On: February 25, 2026 2:45 AM
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नालंदा (बिहार हेडलाइन): बिहार का नालंदा जिला एक बार फिर साइबर अपराध के एक अजीबोगरीब और शातिर मामले को लेकर चर्चा में है। कतरीसराय थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ के नाम पर लुभावने ऑफर देकर देशभर के लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर एक नाबालिग समेत कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो खेतों और सुनसान चंवर में बैठकर इस हाई-टेक ठगी के साम्राज्य को चला रहे थे।

सोशल मीडिया पर ‘हनीट्रैप’ का बिछाया गया जाल

पुलिस जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इन साइबर अपराधियों ने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ नाम से पेज बना रखे थे। इन पेजों के जरिए विज्ञापन दिया जाता था कि जो भी पुरुष गिरोह द्वारा सुझाई गई महिलाओं को गर्भवती करेगा, उसे 5 से 13 लाख रुपये तक का इनाम दिया जाएगा। इस लुभावने और अनैतिक ऑफर के झांसे में आकर लोग गिरोह के व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क करते थे, जहाँ से ठगी का असली खेल शुरू होता था।

तस्वीरें दिखाकर चॉइस और फिर फीस के नाम पर वसूली

गिरोह के सदस्य बेहद शातिर तरीके से काम करते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उनसे संपर्क करता, वे उसे कई खूबसूरत महिलाओं और लड़कियों की तस्वीरें भेजते थे। शिकार को अपनी पसंद की महिला चुनने को कहा जाता था। एक बार जब व्यक्ति झांसे में आ जाता, तो अपराधी उससे ‘रजिस्ट्रेशन फीस’ के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। भरोसा जीतने के लिए ये अपराधी व्हाट्सएप चैट और फर्जी ऑडियो रिकॉर्डिंग का सहारा लेते थे, ताकि शिकार को लगे कि सब कुछ असली है।

सिक्योरिटी और GST के नाम पर ऐंठी जाती थी रकम

रजिस्ट्रेशन के बाद भी ठगी का सिलसिला रुकता नहीं था। अपराधियों ने ठगी की प्रक्रिया को किसी कॉर्पोरेट ऑफिस की तरह डिजाइन कर रखा था। रजिस्ट्रेशन के बाद शिकार को दोबारा कॉल किया जाता और ‘सिक्योरिटी फीस’, ‘सर्विस टैक्स’ और यहाँ तक कि ‘GST’ के नाम पर 5 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक की अतिरिक्त मांग की जाती थी। इस तरह एक ही व्यक्ति से किस्तों में हजारों रुपये ठग लिए जाते थे और अंत में उसे ब्लॉक कर दिया जाता था।

सुनसान खेतों से संचालित हो रहा था ठगी का नेटवर्क

हैरानी की बात यह है कि लाखों रुपये की ठगी का यह पूरा नेटवर्क किसी आलीशान दफ्तर से नहीं, बल्कि कतरीसराय के सुंदरपुर और बरीठ गांव के सुनसान खेतों और चंवर से चलाया जा रहा था। 12 फरवरी 2026 को पेट्रोलिंग के दौरान एएसआई रूदल पासवान को इस संबंध में सटीक सूचना मिली। जब पुलिस टीम दोपहर के वक्त चंवर में पहुंची, तो देखा कि युवक अलग-अलग झुंड में बैठकर मोबाइल फोन के जरिए ठगी कर रहे थे। पुलिस को देखते ही वे भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया गया।

बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और मोबाइल बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के पास से जब्त किए गए स्मार्टफोन में कई महिलाओं की तस्वीरें, अश्लील विज्ञापन और ठगी से संबंधित चैट मिली हैं। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए पांच आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि एक नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया है। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के बैंक खातों और अन्य नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने में जुटी है। यह मामला एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे साइबर माफिया लोगों की कमजोरियों और लालच का फायदा उठाकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं।


रिपोर्ट: क्राइम डेस्क, बिहार हेडलाइन


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